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भारत की निर्यात सूची में SUVs ने पहली बार यात्री कारों को पीछे छोड़ा — 21
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भारत की निर्यात सूची में SUVs ने पहली बार यात्री कारों को पीछे छोड़ा — 21

भारत की ऑटोमोबाइल उद्योग में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां SUVs अब यात्री कारों को पीछे छोड़ते हुए निर्यात का प्रमुख आधार बन गई हैं। इस बदलाव का सबसे बड़ा प्रमाण तब मिला जब नवंबर 2025 में SUVs का निर्यात 42,993 इकाइयों तक पहुंच गया, जबकि यात्री कारों का निर्यात 40,519 इकाइयों पर रुक गया। यह पहली बार है जब UVs (यूटिलिटी व्हीकल्स) ने पारंपरिक यात्री कारों को मात दी है।

इस बदलाव का मुख्य कारण वैश्विक बाजार में उपभोक्ताओं की बदलती प्राथमिकताएं हैं। जहां पहले यात्री कारें निर्यात में प्रमुखता रखती थीं, वहीं अब SUVs की मांग तेजी से बढ़ रही है।

Quick Highlights

  • नवंबर 2025 में SUVs का निर्यात 42,993 इकाइयों तक पहुंचा।
  • यात्री कारों का निर्यात 40,519 इकाइयों पर रुक गया।
  • FY2023-24 में भारत ने 4.3 लाख यात्री कारें निर्यात कीं।
  • UV निर्यात में 2.88 लाख इकाइयों की वृद्धि हुई।
  • Maruti Suzuki और Hyundai मिलकर 81% यात्री कार निर्यात में योगदान देती हैं।
  • 62% निर्यातित UVs सब-फोर-मीटर श्रेणी में आते हैं।

बाजार में ट्रेंड और प्रतिस्पर्धा

भारत का ऑटोमोबाइल निर्यात बाजार तेजी से बदल रहा है। पिछले कुछ वर्षों में SUVs की मांग में बेतहाशा वृद्धि हुई है। FY2023-24 में, जहां यात्री कारों का निर्यात 4.3 लाख था, वहीं UVs का निर्यात केवल 2.3 लाख था। लेकिन नवंबर 2025 के आंकड़ों ने एक नया मील का पत्थर स्थापित किया।

Maruti Suzuki, जो कि भारत की सबसे बड़ी ऑटो निर्माता कंपनी है, निर्यात में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। Maruti की SUVs, खासकर Jimny, अंतरराष्ट्रीय बाजार में उच्च मांग में हैं। इसके अलावा, Nissan, Toyota और Hyundai भी अपने UVs के निर्यात में मजबूती से आगे बढ़ रहे हैं।

खरीदारों पर प्रभाव

SUVs की बढ़ती मांग का सीधा असर खरीदारों पर पड़ रहा है। जहां पहले ग्राहक मुख्य रूप से यात्री कारों की ओर आकर्षित होते थे, वहीं अब SUVs की लोकप्रियता ने उन्हें नई दिशा दी है। उपभोक्ता अब उन वाहनों की तलाश कर रहे हैं जो न केवल स्टाइलिश हों, बल्कि उच्च ईंधन दक्षता और बेहतर प्रदर्शन भी प्रदान करें।

सब-फोर-मीटर श्रेणी में आने वाले मॉडल्स, जो कि 62% निर्यात का हिस्सा हैं, खासतौर पर पर्यावरण के अनुकूल हैं और इन्हें वैश्विक बाजार में अधिक स्वीकार्यता मिल रही है।

निष्कर्ष

भारत में SUVs के निर्यात में वृद्धि दर्शाती है कि उपभोक्ता प्राथमिकताएं कैसे बदल रही हैं। यह परिवर्तन न केवल भारतीय बाजार के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी भारत की ऑटोमोबाइल उद्योग की पहचान को मजबूत कर रहा है। आने वाले वर्षों में अगर यह ट्रेंड जारी रहा, तो भारत एक प्रमुख ऑटोमोबाइल निर्यातक के रूप में उभर सकता है।

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